हिन्दी व्याकरण क्या है ? - What is Hindi Grammar?

भाषा ही एक मात्र ऐसा साधन है, जिसके माध्यम से मनुष्य अपने हृदय के भाव एवं मस्तिष्क के विचार दूसरे मनुष्यों के समक्ष प्रकट कर सकता है और इस प्रकार समाज में पारस्परिक जुड़ाव की स्थिति बनती है।
भाषा वह साधन है जिसके माध्यम से हम सोचते हैं और अपने भावों/विचारों को व्यक्त करते हैं।
भाषा शब्द संस्कृत के ‘भाष’ से व्युत्पन्न है। ‘भाष’ धातु से अर्थ ध्वनित होता है-प्रकट करना। जिस माध्यम से हम अपने मन के भाव एवं मस्तिष्क के विचार बोलकर प्रकट करते हैं, उसे ‘भाषा’ संज्ञा दी गई है।
समय के साथ-साथ भाषा में भी परिवर्तन आता रहता है। इसी कारण संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश आदि आर्य भाषाओं के स्थान पर आज हिन्दी, राजस्थानी, गुजराती, पंजाबी सिंह बंगला, उड़िया, असमिया, मराठी आदि अनेक भाषाएँ प्रचलित हैं। भारत की राजभाषा हिन्दी स्वीकारी गई है।

वर्ण (Sound) - हिन्दी व्याकरण

ऐसी ध्वनियाँ जिनका उच्चारण करने में अन्य किसी ध्वनि की सहायता की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें स्वर कहते हैं। स्वर ग्यारह होते हैं, अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, ऋ।

शब्द विचार - हिन्दी व्याकरण

एक या एक से अधिक वर्षों से बने सार्थक ध्वनि-समूह को शब्द कहते हैं।
शब्द के भेद / प्रकार:- (4 भेद/प्रकार)
1. उत्पत्ति एवं स्रोत के आधार पर (तत्सम-तद्भव, देशज, विदेशी)
2. रचना के आधार पर
3. प्रयोग के आधार पर
4. अर्थ के आधार पर

संज्ञा (Nown) - हिन्दी व्याकरण

परिभाषा : किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, भाव, अवस्था, गुण या दशा के नाम को सज्ञा कहते है।
जैसे आलोक, पुस्तक, जोधपुर, दया, बचपन, मिठास, गरीबी आदि।

सर्वनाम (Pronoun) - हिन्दी व्याकरण

सर्वनाम शब्द का अर्थ है- सब का नाम।
वाक्य में संज्ञा की पुनरुक्ति को दूर करने के लिए संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं जैसे- गुंजन विद्यालय जाती है। वह वहाँ पढ़ती है।
सर्वनाम के प्रकार : ( छ: प्रकार )
1. पुरुषवाचक सर्वनाम 2. निश्चयवाचक सर्वनाम 3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम 4. प्रश्नवाचक सर्वनाम 5. सम्बन्धवाचक सर्वनाम 6. निजवाचक सर्वनाम

विशेषण (Adjectives) - हिन्दी व्याकरण

परिभाषा : वे शब्द, जो किसी संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बतलाते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं। जैसे नीला-आकाश, छोटी लड़की, दुबला आदमी, कुछ पुस्तकें में क्रमशः नीला, छोटी, दुबला, कुछ शब्द विशेषण हैं, जो आकाश, लड़की, आदमी, पुस्तकें आदि संज्ञाओं की विशेषता का बोध कराते हैं।
अतः विशेषता बतलाने वाले शब्द विशेषण कहलाते हैं।

क्रिया (Verbs) - हिन्दी व्याकरण

वे शब्द, जिनके द्वारा किसी कार्य का करना या होना पाया जाता है, उन्हें क्रिया पद कहते हैं। संस्कृत में क्रिया रूप को धातु कहते हैं, हिन्दी में उन्हीं के साथ 'ना' लग जाता है जैसे लिख से लिखना, हँस से हँसना।
कर्म, प्रयोग तथा संरचना के आधार पर क्रिया के भेद किए गए है।

क्रिया विशेषण (Adverb) - हिन्दी व्याकरण

वे अविकारी या अव्यय शब्द, जो क्रिया की विशेषता बतलाते हैं. उन्हें क्रिया विशेषण कहते हैं। 1. रमेश धीरे चलता है। 2. वह तेज बोलता है। 3. शोभा नीचे ठहरती है। 4. उसका भाई कम खाता है । ऊपर के वाक्यों में चलता है, बोलता है, ठहरती है, खाता है क्रियाएँ हैं और धीरे, तेज, नीचे, कम शब्द क्रिया की विशेषताएँ बताते हैं, इसलिए इन्हें क्रिया-विशेषण कहते हैं ।

समुच्चय बोधक (Conjunction) - हिन्दी व्याकरण

वे अव्यय शब्द, जो दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें प्रक समुच्चय बोधक अव्यय या संयोजक शब्द कहते हैं। जैसे - और, तथा, एवं, तो, जो, फिर, यथा, यदि, पुनः, इसलिए, कि, मानो, किन्तु, परन्तु, पर, वरना, बल्कि, अपितु, क्योंकि, या, चाहे, ताकि, यद्यपि, अन्यथा आदि।

संबंधबोधक (Connective) - हिन्दी व्याकरण

वे अव्यय शब्द, जो किसी संज्ञा या सर्वनाम शब्द के साथ लगकर उसका सम्बन्ध वाक्य में प्रयुक्त अन्य शब्द से बताते हैं, उन्हें सम्बन्ध बोधक अव्यय कहते हैं।

विस्मयादि बोधक (Exclamation) - हिन्दी व्याकरण

वे अव्यय शब्द, जो आश्चर्य, विस्मय, शोक, घणा, प्रशंसा, प्रसन्नता, भय आदि भावो का बोध कराते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं।
विस्मयादि बोधक (!) विस्मय, हर्ष, शोक, घृणा, आदि भावों को प्रकट करने के लिए जो शब्द आते हैं, उनके आगे यह ( !) चितून लगता है । जैसे - हे ! , अरे ! , धन्य धन्य ! , बाह वाह ! , छिः ! आदि ।

लिंग (Gender) - हिन्दी व्याकरण

लिंग शब्द का अर्थ होता है चिह्न या पहचान। व्याकरण के अन्तर्गत लिंग उसे कहते हैं, जिसके द्वारा किसी विकारी शब्द के स्त्री या पुरुष जाति का होने का बोध होता है। हिन्दी भाषा में लिंग दो प्रकार के होते हैं - (i) पुल्लिंग (ii) स्त्रीलिंग

वचन (Vachan) - हिन्दी व्याकरण

सामान्यतः वचन शब्द का प्रयोग किसी के द्वारा कहे गये कथन अथवा दिये गये आश्वासन के अर्थ में किया जाता है, किन्तु व्याकरण में वचन का अर्थ संख्या से लिया जाता है। वह, जिसके द्वारा किसी विकारी शब्द की संख्या का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं।
प्रकार : वचन दो प्रकार के होते हैं। (i) एक वचन (ii) बहुवचन

कारक (Karak) - हिन्दी व्याकरण

‘कारक' शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है 'करनेवाला' किन व्याकरण में यह एक पारिभाषिक शब्द है। जब किसी संज्ञा या सर्वनाम पर का सम्बन्ध वाक्य में प्रयक्त अन्य पदों, विशेषकर क्रिया के साथ जाना जाता है, उसे कारक कहते हैं
प्रकार : हिन्दी व्याकरण में कारक आठ प्रकार के होते हैं।

काल (Tense) - हिन्दी व्याकरण

व्याकरण में क्रिया के होने वाले समय को काल कहते हैं। काल तीन प्रकार के होते हैं।
1. भूतकाल 2. वर्तमान काल 3. भविष्यत् काल

वाच्य (Voice) - हिन्दी व्याकरण

वाक्य में प्रयुक्त क्रिया रूप कर्ता, कर्म या भाव किसके अनुसार प्रयुक्त हुआ है, इसका बोध कराने वाले कारकों को वाच्य कहते हैं।
प्रकार: वाच्य तीन प्रकार के होते है। 1. कर्तृवाच्य 2. कर्मवाच्य 3. भाववाच्य

पद परिचय (Pad Parichay) - हिन्दी व्याकरण

वाक्य में प्रयुक्त प्रत्येक सार्थक शब्द को पद कहते हैं तथा उन शब्दों के व्याकरणिक परिचय का पद परिचय- पद व्याख्या या पदान्वय कहते हैं। पद परिचय में उस शब्द के भेद, उपभेद, लिग, वचन, कारक आदि के परिचय के साथ, वाक्य में प्रयुक्त अन्य पदों के साथ उसक सम्बन्ध का भी उल्लेख किया जाता है।

सन्धि (Sandhi/ Junction) - हिन्दी व्याकरण

दो ध्वनियों (वों) के परस्पर मेल को सन्धि कहते हैं। अर्थात् जब दो शब्द मिलत है ता प्रथम शब्द की अन्तिम ध्वनि (वर्ण) तथा मिलने वाले शब्द की प्रथम ध्वनि के मेल से जो विकार होता है उसे सन्धि कहते हैं। ध्वनियों के मेल में स्वर के साथ स्वर (राम+अवतार), स्वर के साथ व्यंजन (आ+छादन), व्यंजन के साथ व्यंजन (जगत्+नाथ), व्यंजन के साथ स्वर (जगत्+ईश), विसर्ग के साथ स्वर (मनःअनुकूल) तथा विसर्ग के साथ व्यंजन (मनः+हर), का मेल हो सकता है।
सन्धि तीन प्रकार की होती है 1. स्वर सन्धि2. व्यंजन सन्धि 3. विसर्ग सन्धि

समास (Compound) - हिन्दी व्याकरण

समास शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है "छोटा-रूप। अतः जब दो या दो से अधिक शब्द (पद) अपने बीच की विभक्तियों का लोप कर जो छोटा रूप बनाते हैं, उसे समास, सामासिक शब्द या समस्त पद कहते हैं। जैसे रसोई के लिए घर' शब्दों में से 'के लिए विभक्ति का लोप करने पर नया शब्द बना रसोई घर', जो एक सामासिक शब्द है।

उपसर्ग (Upsarg/Prefix) - हिन्दी व्याकरण

वे शब्दांश जो किसी मूल शब्द के पूर्व में लगकर नये शब्द का निर्माण करते हैं अर्थात् नये अर्थ का बोध कराते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं। ये शब्दांश होने के कारण वैसे इनका स्वतन्त्र रूप से अपना कोई महत्त्व नहीं होता किन्तु शब्द के पूर्व संश्लिष्ट अवस्था में लगकर उस शब्द विशेष के अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं।

प्रत्यय (Pratyay/Suffix) - हिन्दी व्याकरण

वे शब्दांश जो किसी शब्द के अन्त में लगकर उस शब्द के अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं, अर्थात नये अर्थ का बोध कराते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं।
हिन्दी में प्रत्यय मुख्यत : दो प्रकार के होते हैं (i) कृदन्त प्रत्यय (ii) तद्धित प्रत्यय ।

पर्यायवाची शब्द (Paryayvachi/ Synonym words)

भाषा में शब्द और अर्थ दोनों का अपना विशिष्ट स्थान एवं महत्त्व है। एक अर्थ हेतु एक शब्द विशेष होता है, परंतु भाषा-प्रयोग की दृष्टि से उस एक ही शब्द का अनेक बार प्रयोग उचित प्रतीत नहीं होता। ऐसी परिस्थिति में निहितार्थ की अभिव्यक्ति हेतु उसी के समान अर्थ प्रतीति कराने वाले अन्य शब्द का प्रयोग किया जाता है। ऐसे समानार्थी शब्द ही पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

विलोम शब्द (Vilom/Antonyms) - हिन्दी व्याकरण

विलोम शब्द वे शब्द कहलाते हैं जो विपरीत अर्थ प्रकट करते हैं। विलोम शब्दों का ज्ञान तथा उनके प्रयोग का कौशल अर्जित करना इसलिए आवश्यक है कि जिससे भाषा ऐसी बन सके जो उत्तम एवं आर्कषक तो हो ही, साथ ही विचारों को सम्प्रेषित करने में सक्षम हो सके ।

समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द (युग्म शब्द)

विश्व की प्राय: सभी भाषाओं में अनेक शब्द ऐसे होते हैं, जिनके उच्चारण में तो थोड़ी बहुत भिन्नता होती है, परंतु अर्थ की दृष्टि में वे शब्द बिलकुल भिन्न होते हैं। यदि प्रयोक्ता को ऐसे शब्द-युग्मों के अतर का ज्ञान नहीं होगा तो अर्थ का अनर्थ या विकृत अर्थ हो जाएगा जो समाज के लिए घातक सिद्ध होगा।

वाक्यांश के लिए एक शब्द

कई बार हमें बातचीत करने समय कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना पड़ जाता है, जिससे पूरे एक वाक्य का अर्थ स्पष्ट हो जाता है। हिन्दी भाषा को ऐसे शब्दों के प्रयोग से प्रभावशाली बनाया जा सकता है। व्याकरण में ऐसे शब्दों से हम किसी वाक्य में छुपे हुए भाव का पता लगाया जा सकता है।

एकार्थक शब्द (Sound) - हिन्दी व्याकरण

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adsfasdfasdf (Sound) - हिन्दी व्याकरण

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